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रहीम के दोहे Rahim ke Dohe Hindi Meaning

रहीम के दोहे (Rahim ke Dohe) रहीम के दोहों की कुछ पंक्तियाँ यहाँ दी गयी हैं और उनका भावार्थ भी दिया गया हैं | Here is a list of Rahim ke dohe with hindi language meaning / bhavarth. Here some doha's mean described below : रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय भावार्थ - रहीम जी कहते हैं कि मन लगाकर कोई काम कर, देखें तो कैसे सफलता मिलती है। अगर अच्छी नीयत से प्रयास किया जाये तो नर क्या नारायण को भी अपने बस में किया जा सकता है। रहिमन थोरे दिनन को, कौन करे मुहँ स्याह नहीं छलन को परतिया, नहीं कारन को ब्याह अर्थ: रहीम जी कहते हैं कि कुछ समय के लिए मनुष्य अपने मुहँ पर कालिमा क्यों लगाए? दूसरी स्त्री को धोखा नहीं दिया जाता और न ही विवाह ही किया जा सकता| भावार्थ - दूसरी स्त्री को प्रेम का दिखावा कर उसे धोखा देना ही है, और उससे विवाह कर तो निभाया भी नहीं जा सकता| कोई पुरुष एक समय में दो स्त्रियों के साथ एक जैसा प्रेम नहीं कर सकता| अत उसे एक विवाह ही करना चाहिए| गुन ते लेत रहीम जन, सलिल कूप ते काढि कूपहु ते कहूँ होत है, मन काहू को बाढी ...

कबीर के दोहे सूची (List of KABIR DAR KE DOHE)

कबीर के दोहे (Kabir ke Dohe) कबीर के दोहों की कुछ पंकितियों नीचे एक सूची में हैं Kabir das is famous for their Doha and peoples made conversion according to their language as in hindi, english, etc. Here is list of Kabir das ke dohe shown below. जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं। प्रेम गली अति सॉंकरी, तामें दो न समाहिं।। (Jab main tha tab hari nahi, ab hari hain main nahi Prem gali ati saukri, taamen do na samahin) जहां दया तहं धर्म है, जहां लोभ तहं पाप। जहां क्रोध तहं काल है, जहां क्षमा आप॥ चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह। जिनको कछू न चाहिए, सोई साहंसाह॥ हीरा पड़ा बाज़ार में, रहा छार लपटाय। बहुतक मूरख चलि गए, पारख लिया उठाय॥ बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिल्य कोए। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोए॥ चलती चाकी देख के, दिया कबीरा रोई। दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोई॥ माया दीपक नर पतंग, भ्रमि भ्रमि ईवै पडंत। कहै कबीर गुरु ज्ञान ते, एक आध उबरंत॥ माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंदे मोय । एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूगी तोय ॥ पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पं...

कबीर के दोहे Kabir Ke Dohe Hindi Meaning

संत कबीर के दोहे (Sant Kabir ke Dohe ) कबीर के दोहों की कुछ पंक्तियाँ यहाँ दी गयी हैं और उनका भावार्थ भी दिया गया हैं | Here is a list of Sant Kabir dast ke dohe with hindi meaning. Here some doha's mean described below : कुटिल वचन सबतें बुरा, जारि करै सब छार। साधु वचन जल रूप है, बरसै अमृत धार।। भावार्थ- कबीर जी कहते हैं कि कटु वचन बहुत बुरे होते हैं और उनकी वजह से पूरा बदन जलने लगता है। जबकि मधुर वचन शीतल जल की तरह हैं और जब बोले जाते हैं तो ऐसा लगता है कि अमृत बरस रहा है। शब्द न करैं मुलाहिजा, शब्द फिरै चहुं धार। आपा पर जब चींहिया, तब गुरु सिष व्यवहार।। भावार्थ - कबीर दास जी कहते हैं कि शब्द किसी का मूंह नहीं ताकता। वह तो चारों ओर निर्विघ्न विचरण करता है। जब शब्द ज्ञान से अपने पराये का ज्ञान होता है तब गुरु शिष्य का संबंध स्वतः स्थापित हो जाता है। कबीर गर्व न कीजिए, ऊंचा देखि आवास काल परौं भूईं लेटना, ऊपर जमसी घास भावार्थ - कबीर दास जी कहते हैं कि अपना शानदार मकान और शानशौकत देख कर अपने मन में अभिमान मत पालो जब देह से आत्मा निकल जाती हैं तो देह जमीन पर रख दी ...